Kabir Amritvani Lyrics in Hindi/English – Gulshan Kumar

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Kabir Das was the Famous Indian Poet in the 15th Century, as for he has composed Kabir Amritvani Lyrics.

And this Kabir Amritwani Lyrics are like a Hindu Bhakti Movement Bhajan, which like a Amrit Song.

The lines of the Kabir Amritwani Lyrics are very Deliteful for the Person who listen to this Bhajan.

Kabir Amritvani Credits

Kabir Amritvani Credits 
SingerGulshan Kumar
LyricistGulshan Kumar
CompanyT-Series

Kabir Amritvani Lyrics in Hindi

नहाए धोए क्या भाया
जो मॅन का मैल ना जाए
मीन सदा जल मे रहे
धोए बाज़ ना जाए
धोए बाज़ ना जाए कबीरा
धोए बाज़ ना जाए

जाती नही जगदीश की हरिजन की कहा होये
जात पात के बीच मे डूब मरो मत कोए

मगन गये सो मार रहे मारे जो मगन जाहि
तीन के पहले वो मारे हॉट करात है नाही

कबीरा खड़ा बाज़ार मे सबकी मागे खैर
ना काहु से दोस्ती ना काहु से बैर

सत्या नाम जाने बिना हंस लोक नही जाए
ज्ञानी पंडित सूरमा कारगए मुए उपाय

भाव बिना भक्ति नही भक्ति बिना नही भाव
भक्ति भाव एक रूप दौ एक सुभाव

जिन खोजा तीन पया गहरे पानी बैठ
मई तो बौरी बांगाई रही किनारे बैठ

कामी क्रोधी लालची इंपे भक्ति ना होये
भक्ति करे कोई सूरमा जात बरन कुल खोए

गुरु आगया माने नही चले अटपटी चल
लोक वेद दोनो गये आए सिर पर काल
कबीरा आए सिर पर काल

हम वासी उस देश के जहा जाती बरन कुल नही
शब्द मिलवा हो रहा देह मिलवा नही

कामी का गुर कामिनी लोभी का गुर दाम
कबीरा का गुर संत है संतान का गुरु राम

शब्द संभाले बोलिए शब्द के हाथ ना पॅव
एक शबाद औशाद करे एक शबाद करे घाव

गुरु को सिर पर रखिए चलिए अगया माही
कह कबीर ता दास को टीन लोक भय नाही कबीरा

घायल की गति और है औरान की गति और
प्रेम बान हृदय लगा रहा कबीरा तौर

हम वाशी उस देश के जहा पार ब्रम्‍हा का घेर
दीपक जले अगम का बिन बाटी बिन फेर

ना कुच्छ किया ना कर सका ना करने जोग शरीर
जो कुच्छ किया हरी किया भाया कबीर कबीर

Kabir Amritvani Lyrics in English

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