Nirvana Shatakam Lyrics and it’s Meaning (Download)

Nirvana Shatakam Lyrics is a very wonderful creation by Shankaracharya.

In the Nirvana Shatakam reveals the dualistic nature of spiritual being as a human.  Nirvana Shatakam reveals that 99% of our self is non-form that which can’t be seen and touch.

Nirvana Shatakam further elaborates that not only we are formless but a joy that can’t be described. The joy is ‘sat-chit-Anand’. The feeling can only be felt by an extra-ordinary ‘Yogi’ who has transcended each and every limit of form as well as formless.

Bhajan Credits

Bhajan CreditsDETAILS
Company/AlbumIsha Foundation
CreaterSadguru
Singer Team Work

Nirvana Shatakam Lyrics with Meaning in English

मनो बुद्ध्यहंकारचित्तानि नाहम्
न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे
न च व्योम भूमिर् न तेजो न वायु:
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥१॥

mano buddhi ahankara chittani naaham
na cha shrotravjihve na cha ghraana netre
na cha vyoma bhumir na tejo na vaayuhu
chidananda rupah shivo’ham shivo’ham

मैं मन नहीं हूँ, न बुद्धि ही, न अहंकार हूँ, न अन्तःप्रेरित वृत्ति;
मैं श्रवण, जिह्वा, नयन या नासिका सम पंच इन्द्रिय कुछ नहीं हूँ
पंच तत्वों सम नहीं हूँ (न हूँ आकाश, न पृथ्वी, न अग्नि-वायु हूँ)
वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।

I am not the mind, the intellect, the ego or the memory,
I am not the ears, the skin, the nose or the eyes,
I am not space, not earth, not fire, water or wind,
I am the form of consciousness and bliss,
I am the eternal Shiva…

न च प्राण संज्ञो न वै पञ्चवायु: 
न वा सप्तधातुर् न वा पञ्चकोश:
न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायू 
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥२॥

na cha prana sangyo na vai pancha vayuhu
na va sapta dhatur na va pancha koshah
na vak pani-padam na chopastha payu
chidananda rupah shivo’ham shivo’ham

मैं नहीं हूँ प्राण संज्ञा मुख्यतः न हूँ मैं पंच-प्राण1 स्वरूप ही,
सप्त धातु2 और पंचकोश3 भी नहीं हूँ, और न माध्यम हूँ
निष्कासन, प्रजनन, सुगति, संग्रहण और वचन का4;
वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।  
1. प्राण, उदान, अपान, व्यान, समान;  2. त्वचा, मांस, मेद, रक्त, पेशी, अस्थि, मज्जा; 
3. अन्नमय, मनोमय, प्राणमय, विज्ञानमय, आनन्दमय; 4. गुदा, जननेन्द्रिय, पैर, हाथ, वाणी

I am not the breath, nor the five elements,
I do not matter, nor the 5 sheaths of consciousness
Nor am I the speech, the hands, or the feet,
I am the form of consciousness and bliss,
I am the eternal Shiva…

न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ 
मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव:
न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: 
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥३॥ 

Na me dvesha ragau na me lobha mohau
na me vai mado naiva matsarya bhavaha
na dharmo na chartho na kamo na mokshaha
chidananda rupah shivo’ham shivo’ham

न मुझमें द्वेष है, न राग है, न लोभ है, न मोह,
न मुझमें अहंकार है, न ईर्ष्या की भावना 
न मुझमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही हैं, 
वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।  

There is no like or dislike in me, no greed or delusion,
I know not pride or jealousy,
I have no duty, no desire for wealth, lust or liberation,
I am the form of consciousness and bliss,
I am the eternal Shiva…

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खम् 
न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा: न यज्ञा:
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता 
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥४॥

na punyam na papam na saukhyam na duhkham
na mantro na tirtham na veda na yajnah
aham bhojanam naiva bhojyam na bhokta
chidananda rupah shivo’ham shivo’ham

न मुझमें पुण्य है न पाप है, न मैं सुख-दुख की भावना से युक्त ही हूँ
मन्त्र और तीर्थ भी नहीं, वेद और यज्ञ भी नहीं
मैं त्रिसंयुज (भोजन, भोज्य, भोक्ता) भी नहीं हूँ
वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।

No virtue or vice, no pleasure or pain,
I need no mantras, no pilgrimage, no scriptures or rituals,
I am not the experienced, nor the experience itself,
I am the form of consciousness and bliss,
I am the eternal Shiva…

न मृत्युर् न शंका न मे जातिभेद: 
पिता नैव मे नैव माता न जन्म
न बन्धुर् न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: 
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥५॥

na me mrtyu shanka na mejati bhedaha
pita naiva me naiva mataa na janmaha
na bandhur na mitram gurur naiva shishyaha
chidananda rupah shivo’ham shivo’ham

न मुझे मृत्य-भय है (मृत्यु भी कैसी?), न स्व-प्रति संदेह, न भेद जाति का
न मेरा कोई पिता है, न माता और न लिया ही है मैंने कोई जन्म
कोई बन्धु भी नहीं, न मित्र कोई और न कोई गुरु या शिष्य ही
वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।

I have no fear of death, no caste or creed,
I have no father, no mother, for I was never born,
I am not a relative, nor a friend, nor a teacher nor a student,
I am the form of consciousness and bliss,
I am the eternal Shiva…

अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ 
विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्
न चासंगतं नैव मुक्तिर् न मेय: 
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥६॥ 

aham nirvikalpo nirakara rupo
vibhut vatcha sarvatra sarvendriyanam
na cha sangatham naiva muktir na meyaha
chidananda rupah shivo’ham shivo’ham

मैं हूँ संदेह रहित निर्विकल्प, आकार रहित हूँ 
सर्वव्याप्त, सर्वभूत, समस्त इन्द्रिय-व्याप्त स्थित हूँ   
न मुझमें मुक्ति है न बंधन; सब कहीं, सब कुछ, सभी क्षण साम्य स्थित
वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।
आचार्य शंकर रचित निर्वाण षटकम्‌ ||

I am devoid of duality, my form is formlessness,
I exist everywhere, pervading all senses,
I am neither attached, neither free nor captive,
I am the form of consciousness and bliss,
I am the eternal Shiva…

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